छठ पर्व 2025 (Chhath 2025) — आस्था, अनुशासन और सूर्योपासना का महापर्व

Screenshot 2025 10 27 133353

बुलन्दशहर, 27 अक्टूबर 2025: छठ पर्व पूर्वोत्तर भारत और नेपाल के पारंपरिक त्योहारों में से एक है जो सूर्य देव और छठी मईया (छठी देवी) की उपासना के रूप में मनाया जाता है। यह चार दिन का व्रत-समारोह है जिसमें श्रद्धालु साफ-सफाई, संयम और कठोर नियमों के साथ सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस साल छठ पर्व प्रमुख रूप से 25 से 28 अक्टूबर 2025 के बीच मनाया जा रहा है।

छठ पूजा क्यों मनाई जाती है? (Chhath 2025)

छठ पूजा का मूल उद्देश्य सूर्य देव की आराधना करके परिवार की भलाई, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करना है। परंपरागत रूप से यह व्रत न केवल देवी-देवताओं की पूजा है, बल्कि प्रकृति और सूर्य से आभारी होने का संस्कार भी माना जाता है — सूर्य को जीवनदायी ऊर्जा का स्रोत समझकर उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। छठी मईया को भी रक्षा और संतान-कल्याण के लिए पूजित किया जाता है। छठ के दौरान सादगी, शुद्ध आहार और स्वच्छता का विशेष महत्व है।

इतिहास (History / Origin)

छठ पर्व का उल्लेख प्राचीन वैदिक काल से मिलता है। यह पर्व मुख्य रूप से मिथिला, मगध और अवध क्षेत्रों की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। यह न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है — सामुदायिक सहयोग, सफाई और स्वास्थ्य संबंधी परंपराएँ इसे जीवनशैली का उत्सव बना देती हैं।

कहाँ मनाया जाता है? (Where)

छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे महानगरों में भी प्रवासी समुदायों के कारण यह पर्व बड़े स्तर पर आयोजित किया जाता है। श्रद्धालु नदियों, तालाबों और झीलों के घाटों पर सूर्य को अर्घ्य देते हैं, वहीं कई लोग अपने घरों में कृत्रिम तालाब बनाकर पूजा करते हैं।

कब और कैसे मनाया जाता है? (When & Day-wise Rituals)

छठ पर्व चार दिनों तक चलता है और प्रत्येक दिन का विशेष धार्मिक महत्व होता है:

  • पहला दिन — नहाय-खाय: भक्त पवित्र स्नान करते हैं और शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। इसी दिन व्रत की शुरुआत होती है।
  • दूसरा दिन — खरना: दिनभर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर, रोटी और ठेकुआ का प्रसाद बनाया जाता है।
  • तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य: अस्त होते सूर्य को घाटों पर अर्घ्य दिया जाता है। महिलाएँ दीप जलाती हैं और लोकगीत गाती हैं।
  • चौथा दिन — उषा अर्घ्य और पारण: सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत तोड़ा जाता है। इसे “पारण” कहा जाता है।

रिवाज़, आचार-विहार और प्रसाद (Rituals & Prasad)

छठ पर्व में व्रतधारी महिलाएँ 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं। पूजा में ठेकुआ, गुड़-चावल की खीर, नारियल, केला, गन्ना और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं। पूजा स्थल की शुद्धता, दीपों की रोशनी और लोकगीतों की गूंज इस पर्व को अत्यंत मनमोहक बना देती है।

पर्यावरण और सामाजिक संदेश (Environment & Social Significance)

छठ पूजा प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त उदाहरण है। इसमें नदी-घाटों की सफाई, प्लास्टिक का उपयोग न करने और स्वच्छता बनाए रखने का विशेष ध्यान दिया जाता है। यह पर्व सामुदायिक सहयोग, अनुशासन और पर्यावरण जागरूकता को भी प्रोत्साहित करता है।

सुरक्षा और व्यवहारिक सुझाव (Safety & Practical Tips)

  1. घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता का ध्यान रखें।
  2. प्लास्टिक सामग्री और गैर-घटक वस्तुओं को जल में न डालें।
  3. भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
  4. बुजुर्गों और बच्चों के लिए अतिरिक्त सतर्कता रखें।

छठ पर्व केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, स्वच्छता और प्रकृति के प्रति समर्पण का पर्व है। यह समाज को एकजुट करता है और हमें सिखाता है कि जीवन में सादगी, संयम और कृतज्ञता का कितना महत्व है। भविष्य में इस पर्व को और भी सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-मित्र बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *